Press Trust of India | September 2, 2026 | 11:44 AM IST | 3 mins read
12,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्रालय, आईआईटी परिषद और संयुक्त प्रवेश बोर्ड (जेएबी) से मांग की है कि जेईई-एडवांस्ड में शामिल होने के अवसरों की संख्या बढ़ाकर 3 की जाए या फिर 2 प्रयासों की अनुमति 3 लगातार वर्षों में दी जाए।
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नई दिल्ली: देशभर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्र मांग कर रहे हैं कि संस्थानों में प्रवेश का रास्ता मानी जाने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई)-एडवांस्ड में शामिल होने के अवसरों की संख्या दो से बढ़ाकर 3 की जाए। फिलहाल अभ्यर्थियों को लगातार दो वर्षों में अधिकतम दो बार जेईई-एडवांस्ड देने की अनुमति है। पहला प्रयास 12वीं कक्षा पास करने वाले वर्ष में और दूसरा प्रयास उसके अगले लगातार वर्ष में किया जा सकता है। 12,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्रालय, आईआईटी परिषद और संयुक्त प्रवेश बोर्ड (जेएबी) से मांग की है कि जेईई-एडवांस्ड में शामिल होने के अवसरों की संख्या बढ़ाकर तीन की जाए या फिर दो प्रयासों की अनुमति तीन लगातार वर्षों में दी जाए।
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जेईई-मेन में सबसे अधिक अंक पाने वाले 2.5 लाख अभ्यर्थियों को जेईई-एडवांस्ड में बैठने का मौका मिलता है। छात्रों को 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले वर्ष से शुरू होकर लगातार 3 वर्षों में जेईई-मेन में 6 बार बैठने की अनुमति है।
वहीं, एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए एकमात्र प्रवेश परीक्षा राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) में अभ्यर्थियों के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है और वे कितनी भी बार परीक्षा दे सकते हैं।
अभ्यर्थियों ने प्रतिवेदन में कहा, ''मौजूदा व्यवस्था के तहत जेईई-मेन तीन साल में छह प्रयास का अवसर देता है। यदि जेईई-मेन में प्रदर्शन सुधारने का मौका दिया जाता है तो जेईई-एडवांस्ड में इसे सीमित क्यों किया गया है?''
उन्होंने कहा, ''यह असंगति कई छात्रों को उचित अवसर नहीं देती। तीसरा प्रयास प्रतियोगिता बढ़ाएगा, यह धारणा गलत है। जेईई-एडवांस्ड में पहले ही जेईई-मेन के जरिए अभ्यर्थियों का चयन होता है और सीट संख्या में कोई बदलाव नहीं होगा।''
उन्होंने कहा, ''परीक्षा की कठिनाई और मूल्यांकन की प्रक्रिया भी वही रहेगी। आईआईटी में दाखिले के इच्छुक छात्र कई वर्षों से जेईई-एडवांस्ड में तीन प्रयास की मांग करते रहे हैं। हालांकि, अब इस मांग ने अब जोर पकड़ लिया है।
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कोविड-19 महामारी के दौरान जेईई-एडवांस्ड में एक अतिरिक्त प्रयास की अनुमति दी गई थी। प्रतिवेदन में कहा गया कि इससे साबित होता है कि जरूरत पड़ने पर निष्पक्षता के लिए व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है।
प्रतिवेदन में कहा गया, ''यह एक अनावश्यक सीमा हटाने और समान अवसर सुनिश्चित करने का अनुरोध है। प्रतिभा को प्रयासों की संख्या तक सीमित न करें। योग्यता का आकलन उसके सर्वोच्च स्तर पर होने दें।''
अभ्यर्थियों ने कहा कि जेईई-एडवांस्ड में विषयों की गहरी समझ, विश्लेषणात्मक सोच और समस्याओं को हल करने की क्षमता की परीक्षा होती है। उन्होंने कहा कि कई छात्र लगातार तैयारी के बाद ही सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के स्तर तक पहुंच पाते हैं।
उन्होंने कहा, ''जेईई-एडवांस्ड एक दिन में होने वाली बेहद दबावपूर्ण परीक्षा है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, चिंता या छोटी-सी गलती भी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। 2 प्रयास किसी छात्र की वास्तविक क्षमता को नहीं दर्शा सकते।''
अभ्यर्थियों ने कहा कि सभी छात्रों को शुरुआत से समान जानकारी, मार्गदर्शन या संसाधन उपलब्ध नहीं होते। उन्होंने कहा कि ग्रामीण या वंचित पृष्ठभूमि के कई छात्र 12वीं कक्षा के बाद ही गंभीर तैयारी शुरू करते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है।
उन्होंने कहा कि कुछ छात्रों को शुरुआती दौर से ही व्यवस्थित तैयारी की सुविधा मिलती है, जबकि अन्य छात्र देर से शुरुआत करते हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार, 3 प्रयास इस अंतर को कम करने और सभी को समान अवसर देने में मदद करेगा।