बिहार सरकार 16 मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का पीपीपी मॉडल पर संचालन करेगी, सीएम सम्राट चौधरी ने दी मंजूरी
Press Trust of India | August 6, 2026 | 10:26 AM IST | 2 mins read
मंत्रिमंडल बैठक के बाद जारी बयान के अनुसार, सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से मेडिकल कॉलेज में शिक्षा, प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। बैठक में कुल 17 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।
पटना: बिहार सरकार ने राज्य के 16 ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों (डेंटल कॉलेज सहित) का संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर कराने का फैसला किया है। सीएम सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से मेडिकल कॉलेज में शिक्षा, प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। बैठक में कुल 17 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।
मंत्रिमंडल ने परियोजना के क्रियान्वयन के लिए प्राइस वाटरहाउस कूपर्स प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके लिए कंपनी को 8.27 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जाएगा।
PPP मॉडल के तहत संचालित होने वाले संस्थान
कंपनी का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। पीपीपी मॉडल के तहत संचालित किए जाने वाले संस्थानों में पावापुरी, मधेपुरा, पूर्णिया तथा नालंदा जिले के रहुई स्थित डेंटल कॉलेज शामिल हैं।
इसके अलावा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली, भोजपुर, बक्सर, सिवान, बेगूसराय, जमुई, मुंगेर और सुपौल के निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों का संचालन भी पीपीपी मॉडल पर करने की योजना है।
सरकार ने कहा कि नयी व्यवस्था के तहत संस्थान की परिसंपत्तियों का स्वामित्व और नियामकीय नियंत्रण सरकार के पास रहेगा, जबकि निजी भागीदार संचालन, प्रबंधन और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की जिम्मेदारी निभाएगा।
सीएम सम्राट चौधरी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पर लिखा कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत होंगी तथा आम लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी।
मंत्रिमंडल ने न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एससी, एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 19 अतिरिक्त विशेष अदालतों की स्थापना को भी मंजूरी दी।
ये विशेष अदालतें पश्चिम चंपारण, मधुबनी, भोजपुर, सीवान, अररिया, सुपौल, खगड़िया, जहानाबाद, बक्सर, जमुई, कैमूर, कटिहार, सीतामढ़ी, मुंगेर, मधेपुरा, बांका, शेखपुरा, औरंगाबाद और लखीसराय में स्थापित की जाएंगी।
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