Delhi Government School: दिल्ली में 9वीं के एक लाख और 11वीं के 50 हजार से अधिक छात्र फेल, डीओई ने दी जानकारी
Press Trust of India | July 10, 2024 | 06:42 PM IST | 3 mins read
डीओई के एक अधिकारी ने कहा कि अगर 5वीं और 8वीं कक्षा के छात्र वार्षिक परीक्षा में फेल होते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा।
नई दिल्ली: शिक्षा निदेशालय ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2023-24 की वार्षिक परीक्षाओं से जुड़े चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए हैं। शिक्षा निदेशालय के अनुसार, राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में कक्षा 9 में पढ़ने वाले एक लाख से अधिक बच्चे इस साल फेल हुए हैं। इसी प्रकार, कक्षा 8वीं में 46,000 से अधिक विद्यार्थी तथा कक्षा 11वीं में 50,000 से अधिक विद्यार्थी वार्षिक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके। डीओई ने आरटीआई अधिनियम के तहत दायर आवेदन के जवाब में यह जानकारी मुहैया कराई है।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली सरकार के स्कूलों में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 1,01,331 बच्चे शैक्षणिक सत्र 2023-24 में फेल हुए, जबकि 2022-23 में 88,409, 2021-22 में 28,531 और 2020-21 में 31,540 छात्र फेल हुए।
इसी तरह, कक्षा 11 में शैक्षणिक सत्र 2023-24 में 51,914 बच्चे, 2022-23 में 54,755, 2021-22 में 7,246 और 2020-21 में केवल 2169 बच्चे फेल हुए हैं। दिल्ली शिक्षा निदेशालय के अनुसार, शिक्षा के अधिकार के तहत 'नो-डिटेंशन पॉलिसी' रद्द होने के बाद शैक्षणिक सत्र 2023-24 में कक्षा 8 में 46,622 छात्र फेल हुए हैं।
Delhi Government School: कक्षा 10वीं, 12वीं के आंकड़े
दिल्ली में 10वीं कक्षा के परिणामों की बात करें तो 2024 में 1,64,996 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे और 1,55,442 ने परीक्षा उत्तीर्ण की। डीओई की वेबसाइट के मुताबिक, इस साल 10वीं कक्षा में 94.21 फीसदी विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए जबकि 2023 में 85.84 फीसदी, 2022 में 81.27 फीसदी और 2021 में 97.52 फीसदी छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
साल 2024 में 12वीं के रिजल्ट में 96.99 फीसदी बच्चे परीक्षा में पास हुए, जबकि साल 2023 में 96.29 फीसदी छात्र पास हुए। छात्रों का प्रतिशत 91.50 रहा, 2022 में 96.29 और 2021 में 99.95 रहा।
5वीं, 8वीं के छात्रों को नहीं करेंगे प्रमोट
दिल्ली शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर पीटीआई को दिल्ली सरकार की नई 'प्रोन्नति नीति' के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अगर 5वीं और 8वीं कक्षा के छात्र वार्षिक परीक्षा में फेल होते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें दोबारा परीक्षा देकर दो महीने के भीतर अपने प्रदर्शन को सुधारने का एक और मौका मिलेगा।
अधिकारी ने बताया कि दोबारा परीक्षा में पास होने के लिए हर विषय में 25 फीसदी अंक होना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता है तो उस छात्र को 'रिपीट कैटेगरी' में डाल दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि छात्र को सुधार के लिए अगले सत्र तक उसी कक्षा में रहना होगा।
परिणाम में गिरावट पर प्रतिक्रिया
इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के फेल होने की वजह के बारे में पूछे जाने पर ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और दिल्ली हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील अशोक अग्रवाल ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के अलावा शिक्षा व्यवस्था में भी लापरवाही है। स्कूलों में भले ही बुनियादी ढांचे का स्तर सुधरा हो, शिक्षकों की भर्ती होने लगी हो, लेकिन 20 से 25 हजार पद अभी भी खाली हैं और ज्यादातर पदों पर अतिथि शिक्षक नियुक्त हैं।
कुछ समय पहले एक आरटीआई में यह बात भी सामने आई थी कि पिछले दस सालों में 5747 स्थायी शिक्षकों ने विभिन्न कारणों से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया लेकिन उनकी जगह मात्र 3715 पदों पर ही शिक्षकों की भर्ती की गई। डीओई से मिली जानकारी के अनुसार 2014 में कुल 448 शिक्षकों ने सरकारी स्कूल छोड़ दिए।
जबकि 2015 में 411, 2016 में 458, 2017 में 526, 2018 में 515, 2019 में 519, 2020 में 583, 2021 में 670, 2022 में 667 और 2023 में 950 शिक्षकों ने सरकारी स्कूल छोड़ा। इस प्रकार पिछले 10 सालों में 5747 शिक्षकों के पद रिक्त हो गए। लेकिन इनके एवज में 2014 में 9, 2015 में 8, 2016 में 27, 2017 में 668, 2018 में 207, 2019 में 1576, 2020 में 127, 2021 में 42, 2022 में 931 और 2023 में 120 स्थायी शिक्षकों की भर्ती की गई।
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